عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: مَا خَطَبَنَا نَبِيُّ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَّا قَالَ:
«لَا إِيمَانَ لِمَنْ لَا أَمَانَةَ لَهُ، وَلَا دِينَ لِمَنْ لَا عَهْدَ لَهُ».

[حسن لغيره] - [رواه أحمد] - [مسند أحمد: 12383]
المزيــد ...

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें जब भी संबोधित किया, तो यह बात ज़रूर फ़रमाई :
"उस व्यक्ति के पास (संपूर्ण) ईमान नहीं, जिसके पास अमानतदारी न हो और उस व्यक्ति के पास (संपूर्ण) दीन नहीं, जो वचन का पालन न करता हो।"

[ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर ह़सन)] - [इसे अह़मद ने रिवायत किया है] - [मुसनद अह़मद - 12383]

स्पष्टीकरण

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि ऐसा बहुत कम हुआ कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने लोगों को संबोधित किया या उपदेश दिया और यह दो बातें न कहीं : 1- उस व्यक्ति का ईमान संपूर्ण नहीं है, जिसने किसी के साथ धन, प्राण या परिवार के संबंध में ख़यानत की है। 2- उस व्यक्ति का ईमान संपूर्ण नहीं है, जो वादा करके तोड़ देता हो और वादा पूरा न करता हो।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. इस हदीस में अमानत अदा करने और वादा पूरा करने की प्रेरणा दी गई है। क्योंकि इन दो बातों का पालन न करने से ईमान कमज़ोर होता है।
  2. इस हदीस में अमानत में ख़यानत करने और वादा तोड़ने से सावधान किया गया है। यह दोनों कार्य बड़े गुनाहों में शामिल हैं।
  3. यह हदीस अमानत अदा करने तथा अल्लाह एवं बंदे के बीच होने वाले तथा इन्सानों से किए गए वादों को निभाने की शिक्षा देती है।
अनुवाद दिखाएँ
भाषा: الإنجليزية الإندونيسية البنغالية अधिक (32)
अधिक