عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«أَلاَ أُخْبِرُكُمْ بِأَفْضَلَ مِنْ دَرَجَةِ الصِّيَامِ وَالصَّلاَةِ وَالصَّدَقَةِ؟» قَالُوا: بَلَى، قَالَ: «صَلاَحُ ذَاتِ البَيْنِ، فَإِنَّ فَسَادَ ذَاتِ البَيْنِ هِيَ الحَالِقَةُ».
[صحيح] - [رواه أبو داود والترمذي] - [سنن الترمذي: 2509]
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अबू दरदा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी में रोज़ा, नमाज़ और सदक़ा से भी उत्तम है?" सहाबा ने कहा : अवश्य। तो आपने फ़रमाया : "आपसी मामलों का सुधार, और याद रखो कि आपसी मामलों में बिगाड़ ही धर्म को जड़ से उखाड़ फेंकने वाली वस्तु है।"
[स़ह़ीह़] - [इस ह़दीस़ को अबू दावूद और तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है] - [सुनन तिर्मिज़ी - 2509]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सहाबा से पूछा : क्या मैं तुम्हें अधिक नफ़ल रोज़े, नमाज़ और सदक़ा के सवाब से भी उत्तम बात न बताऊँ? उन्होंने उत्तर दिया : जी हाँ। आपने कहा : झगड़ने वालों के बीच सुलह कराना, क्योंकि दुश्मनी लोगों के बीच फूट, अलगाव, आपसी द्वेष और एक-दूसरे से मुँह मोड़ने को जन्म देती है। वास्तव में, आपसी मामलों में बिगाड़ से पैदा होने वाली नफ़रत ही वह वस्तु है जो धर्म और दुनिया को नष्ट कर देती है और उसे जड़ से उखाड़ फेंकती है, जैसे उस्तरा बालों को जड़ से मूंड देता है।