عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عنهُ سمعتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يقولُ:
«أَلاَ إِنَّ الدُّنْيَا مَلْعُونَةٌ، مَلْعُونٌ مَا فِيهَا، إِلاَّ ذِكْرُ اللهِ وَمَا وَالاَهُ وَعَالِمٌ أَوْ مُتَعَلِّمٌ».
[حسن] - [رواه الترمذي وابن ماجه] - [سنن الترمذي: 2322]
المزيــد ...
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है :
"सुन लो! दुनिया धिक्कारयोग्य है और जो कुछ उसमें है सब धिक्कारयोग्य है, सिवाय अल्लाह के ज़िक्र और उससे संबंधित वस्तुओं के तथा ज्ञानी एवं ज्ञानार्जन करने वाले व्यक्ति के।"
[ह़सन] - [इस ह़दीस़ को तिर्मिज़ी और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है] - [सुनन तिर्मिज़ी - 2322]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि दुनिया और उसकी सारी चीज़ें अल्लाह के निकट घृणित, निंदित, तिरस्कारित एवं अप्रशंसित हैं। क्योंकि दुनिया और उसकी सारी चीज़ें अल्लाह के अतिरिक्त अन्य चीज़ों में व्यस्त तथा अल्लाह से दूर करने का काम करती हैं। इससे अपवाद हैं तो बस अल्लाह का ज़िक्र और उससे मिलती-जुलती अन्य चीज़ें जो अल्लाह को प्रिय हैं, शरई ज्ञान रखने वाला व्यक्ति जो उसे लोगों में बाँटने का काम करता हो या फिर शरई ज्ञान अर्जित करने वाला शख़्स।