عَنْ أَبِي بُرْدَةَ الْأَنْصَارِيِّ رَضيَ اللهُ عنهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ:
«لَا يُجْلَدُ أَحَدٌ فَوْقَ عَشَرَةِ أَسْوَاطٍ إِلَّا فِي حَدٍّ مِنْ حُدُودِ اللهِ».
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح مسلم: 1708]
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अबू बुराद अंसारी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है :
"अल्लाह की सीमाओं के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी और अपराध पर किसी को दस कोड़ों से अधिक नहीं लगाया जाएगा।"
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 1708]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कुछ विशेष गुनाहों के अतिरिक्त अन्य गुनाहों में किसी को दस कोड़े से अधिक मारने से मना किया है। यहाँ मुराद कोड़े लगाने या मारने की वह निर्धारित संख्या विशेष दंड या विशेष दण्ड नहीं है, जो शरई तौर पर साबित है। इस हदीस का मतलब बस इतना है कि किसी को शिष्टाचार के दायरे में रखने के लिए मारना हो, तो अधिक से अधिक दस कोड़े लगा सकते हैं, उससे ज़्यादा नहीं। जैसे कि पत्नी या बेटे को सुधार के लिए मारना।"