عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«لَا يَنْظُرُ اللهُ إِلَى رَجُلٍ أَتَى رَجُلًا أَوِ امْرَأَةً فِي دُبُرٍ».

[صحيح] - [رواه الترمذي والنسائي في الكبرى] - [السنن الكبرى للنسائي: 8952]
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अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"अल्लाह उस व्यक्ति की ओर (दया की दृष्टि से) नहीं देखेगा, जो किसी मर्द या औरत के मलद्वार में संभोग करे।"

[स़ह़ीह़] - [इसे तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में रिवायत किया है] - [नसई की अल-सुनन अल-कुबरा - 8952]

व्याख्या

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक बहुत ही गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि अल्लाह उस व्यक्ति को दया की दृष्टि से नहीं देखेगा, जो किसी पुरुष के साथ गुदा या किसी महिला के साथ गुदा में संभोग करता है। यह कृत्य सबसे बड़े पापों में से एक है।

हदीस का संदेश

  1. पुरुष का दूसरे पुरुष के साथ संभोग अर्थात गुदा मैथुन महा पाप है।
  2. औरत के साथ गुदा मैथुन महा पाप है।
  3. इस हदीस में आए हुए शब्दों "अल्लाह नहीं देखेगा" का अर्थ यह है कि अल्लाह दया एवं करुणा की नज़र से नहीं देखेगा। यहाँ आम देखना मुराद नहीं है। क्योंकि अल्लाह की नज़र से दुनिया की कोई भी चीज़ ओझल नहीं रहती।
  4. ये कृत्य वास्तव में अत्यधिक अनैतिक और मानवता के लिए बहुत हानिकारक हैं, क्योंकि इनमें मानव स्वभाव की शुद्ध प्रकृति का उल्लंघन करना, मानव वंश की संख्या कम करना, विवाहित जीवन को नष्ट और बर्बाद करना, घृणा और दुश्मनी के बीज बोना और गंदे स्थानों पर जाना जैसी चीजें शामिल हैं।
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