عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«خَيْرُكُمْ قَرْنِي، ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ، ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ» قَالَ عِمْرَانُ: لاَ أَدْرِي أَذَكَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدُ قَرْنَيْنِ أَوْ ثَلاَثَةً، قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنَّ بَعْدَكُمْ قَوْمًا يَخُونُونَ وَلاَ يُؤْتَمَنُونَ، وَيَشْهَدُونَ وَلاَ يُسْتَشْهَدُونَ، وَيَنْذِرُونَ وَلاَ يَفُونَ، وَيَظْهَرُ فِيهِمُ السِّمَنُ».
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 2651]
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इम्रान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया :
"तुम में सबसे उत्तम लोग मेरे ज़माने के लोग हैं, फिर वे जो उनके बाद आएँगे और फिर वे जो उनके बाद आएँगे।" इम्रान कहते हैं : मुझे नहीं पता कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बाद में दो ज़माने के लोगों का ज़िक्र किया या तीन ज़माने के लोगों का। नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम्हारे बाद ऐसे लोग आएँगे, जो ख़यानत करेंगे और भरोसे के पात्र समझे नहीं जाएँगे, गवाही देने के लिए बुलाए नहीं जाएँगे फिर भी गवाही देंगे, मन्नत मानकर उसे पूरा नहीं करेंगे और उनके अंदर मोटापा आम हो जाएगा।"
[सह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।] - [صحيح البخاري - 2651]
अल्लाह के नबी सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि किसी एक युग में जीवन बिताने वाले लोगों को सबसे उत्तम गिरोह लोगों का वह वर्ग है, जिसमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके सहाबा मौजूद थे। उसके बाद ईमान वालों का वह वर्ग है, जिसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि को तो नहीं, लेकिन सहाबा किराम को पाया। उसके बाद का वर्ग तबा-ताबेईन का वर्ग है। इस हीदस में सहाबी को इसके बाद के वर्ग यानी चौथे वर्ग के बारे में संकोच है। उसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : निस्संदेह उनके बाद ऐसे लोग सामने आएँगे, जो ख़यानत करेंगे, जिसके कारण लोग उनपर भरोसा नहीं कर पाएँगे। उन्हें गवाही देने के लिए कहा जाए, इससे पहले ही गवाही देने के तैयार हो जाएँगे, मन्नत मानेंगे लेकिन मन्नत पूरी नहीं करेंगे, खाने-पीने के इतने रसिया होंगे कि ख़ूब मोटे नज़र आएँगे।