عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المُؤْمِنينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ:
مَا شَبِعَ آلُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُنْذُ قَدِمَ المَدِينَةَ مِنْ طَعَامِ البُرِّ ثَلاَثَ لَيَالٍ تِبَاعًا، حَتَّى قُبِضَ.
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मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं :
जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिया से चले गए।