عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المُؤْمِنينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ:
مَا شَبِعَ آلُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُنْذُ قَدِمَ المَدِينَةَ مِنْ طَعَامِ البُرِّ ثَلاَثَ لَيَالٍ تِبَاعًا، حَتَّى قُبِضَ.

[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 5416]
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मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं :
जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिया से चले गए।

[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 5416]

व्याख्या

उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा बताती हैं कि जब से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वाले मदीना आए, उन्होंने लगातार तीन दिन तक गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई, यहाँ तक कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मृत्यु को प्राप्त हो गए।

हदीस का संदेश

  1. नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके घर वालों की तंगदस्ती का बयान। क्योंकि असल जीवन तो आख़िरत का जीवन है।
  2. इब्न-ए-हजर कहते हैं : ज़ाहिर बात यह है कि ज़्यादातर उनके पेट न भरने का कारण उनके पास चीज़ों की कमी थी। हालाँकि, कभी-कभी उन्हें कुछ मिल भी जाता था, लेकिन वे अपने ऊपर दूसरों को तरजीह देते थे।
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