عن البراء بن عازب -رضي الله عنهما- قال: «ما رأيتُ من ذِي لِمَّةٍ في حُلَّةٍ حَمْرَاءَ أحسنَ من رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، له شَعْرٌ يَضْرِبُ مَنْكِبَيْهِ، بعيدُ ما بين المَنْكِبَيْنِ، ليس بالقصير ولا بالطويل».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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बरा बिन आज़िब (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि मैंने किसी लंबे बाल वाले लाल जोड़ा पहने व्यक्ति को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक सुंदर नहीं देखा। आपके बाल कंधों को छू रहे होते थे। आपके दो कंधों के बीच फ़ासला था। आप न छोटे क़द के थे, न अधिक लंबे क़द के।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

बरा बिन आज़िब (रज़ियल्लाहु अंहुमा) ने इस हदीस में अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की एक ऐसी विशेषता बयान की है, जो आपके सौंदर्य का प्रमाण प्रस्तुत करती है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं देखा, जिसके बाल उसकी कर्णपाली तक पहुँचे हुए हों और वह लाल जोड़े में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक सुंदर दिखता हो। फिर आपकी कुछ विशेषताएँ बताते हुए बोले कि आपके दोनों कंधों के बीच में (सुंदरता अनुसार उचित) दूरी थी। आप न अधिक लंबे थे कि बेढब दिखें और न इतने नाटे कि ऐब शुमार हो।

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