عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«لَا يَشْكُرُ اللَّهَ مَنْ لَا يَشْكُرُ النَّاسَ»

[صحيح] - [رواه أبو داود والترمذي وأحمد] - [سنن أبي داود: 4811]
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"जो लोगों का शुक्र अदा नहीं करता, वह अल्लाह का शुक्र अदा नहीं कर सकता।"

[स़ह़ीह़] - [इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है] - [सुनन अबू दावूद - 4811]

स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जो व्यक्ति लोगों द्वारा किए गए उपकार और भलाई पर उनका शुक्र अदा नहीं करता, वह आम तौर पर अल्लाह का भी शुक्र अदा नहीं करता। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ये दोनों मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अतः, जिसकी प्रकृति और आदत में लोगों की नेमत की नाशुक्री करना और उनका शुक्र अदा करना छोड़ देना शामिल हो, उसकी आदत में अल्लाह की नेमत की नाशुक्री करना और उसका शुक्र अदा करने में कोताही करना भी शामिल हो जाएगा।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. उपकार पर लोगों का शुक्रिया अदा करने का महत्व।
  2. वास्तविक अनुग्रहकर्ता अल्लाह है और सृष्टि तो केवल एक माध्यम है जिसे अल्लाह जिसके लिए चाहता है, नियुक्त कर देता है, इसीलिए लोगों का शुक्र अदा करना अल्लाह के शुक्र में से ही है।
  3. लोगों के उपकार का शुक्रिया अदा करना उत्तम चरित्र की दलील है।
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भाषा: الإنجليزية الأوردية الإندونيسية अधिक (28)
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