वर्गीकरण:

عَنْ حُذَيْفَةَ رَضيَ اللهُ عنهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«إِنَّهَا سَتَكُونُ أُمَرَاءُ يَكْذِبُونَ وَيَظْلِمُونَ، فَمَنْ صَدَّقَهُمْ بِكَذِبِهِمْ وَأَعَانَهُمْ عَلَى ظُلْمِهِمْ فَلَيْسَ مِنَّي، وَلَسْتُ مِنْهُ، وَلَا يَرِدُ عَلَيَّ الْحَوْضَ، وَمَنْ لَمْ يُصَدِّقْهُمْ بِكَذِبِهِمْ وَلَمْ يُعِنْهُمْ عَلَى ظُلْمِهِمْ فَهُوَ مِنِّي، وَأَنَا مِنْهُ، وَسَيَرِدُ عَلَيَّ الْحَوْضَ».

[صحيح] - [رواه أحمد] - [مسند أحمد: 23260]
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हुज़ैफ़ा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"ऐसे लोग तुम्हारे शासक बन जाएँगे, जो झूठ बोलेंगे और अत्याचार करेंगे। ऐसे में जो उनके झूठ की पुष्टि करेगा और अत्याचार में उनका सहयोग करेगा, उसका मुझसे कोई संबंध नहीं है और मेरा उससे कोई संबंध नहीं है। वह मेरे हौज़ पर पानी पीने नहीं आ सकेगा। तथा जो उनके झूठ की पुष्टि नहीं करेगा और अत्याचार पर उनका सहयोग नहीं करेगा, उसका मुझसे संबंध है और मेरा उससे संबंध है तथा वह मेरे हौज़ पर पानी पीने के लिए आएगा।"

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व्याख्या

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि आपकी मृत्यु के बाद लोगों के शासक ऐसे लोग बन जाएँगे, जो झूठ बोलेंगे, ऐसी बातें करेंगे जिनपर उनका ख़ुद अमल नहीं होगा और निर्णय करते समय अत्याचार करेंगे। जो व्यक्ति ऐसे लोगों के पास जाएगा, उनके झूठ की पुष्टि करेगा, या उनका सहयोग करेगा अत्याचार करके, या अपने कथन द्वारा मसलन उनकी निकटता प्राप्त करने और उनसे कुछ प्राप्त करने की आशा में उनके हक़ में फ़तवा देगा, ऐसे व्यक्ति से मैं बरी हूँ और ऐसा व्यक्ति मुझमें से नहीं है। ऐसा व्यक्ति क़यामत के दिन मेरे पास हौज़ पर नहीं आ सकेगा। इसके विपरीत जो उनके पास नहीं जाएगा, उनके झूठ की पुष्टि नहीं करेगा और उनके अत्याचार में सहयोग नहीं करेगा, वह मुझमें से है और मैं उसमें से हूँ। वह क़यामत के दिन मेरे पास हौज़ पर अवश्य आएगा।

हदीस का संदेश

  1. शासकों के पास जाकर जब उनको सही मार्ग दिखाया जाए, सही बात बताई जाए और उनकी बुराई को कम करने का प्रयास किया जाए, तो यह अपने कर्तव्य का पालन करना हुआ। लेकिन जब उनके पास जाकर उनके अत्याचार को सपोर्ट किया जाए और उनके झूठ की पुष्टि की जाए, तो यह बुरी बात है।
  2. किसी शासक के अत्याचार को सपोर्ट करने पर चेतावनी।
  3. यह चेतावनी बताती है कि ऐसा करना हराम और महा पाप है।
  4. नेकी और परहेज़गारी में सहयोग करने और गुनाह तथा अत्याचार में सहयोग न करने की प्रेरणा।
  5. क़यामत के दिन हमारे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को हौज़ मिलेगा और आपकी उम्मत के लोग उससे जाकर पानी पी सकेंगे।
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