भलाई का आदेश देना तथा बुराई से रोकना

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हदीसों की सूची 13

तुममें से जो व्यक्ति कोई ग़लत काम देखे, वह उसे अपने हाथ से बदल दे। अगर हाथ से बदल नहीं सकता, तो ज़बान से बदले। अगर ज़बान से बदल नहीं सकता, तो अपने दिल से बुरा जाने। यह ईमान की सबसे निचली श्रेणी है।
जिहाद का एक बहुत बड़ा रूप किसी अत्याचारी शासक के सामने न्याय की बात करना है।
अल्लाह की सीमाओं पर रुकने वाले तथा उनका उल्लंघन करने वाले का उदाहरण ऐसा है, जैसे कुछ लोगों ने एक कश्ती में बैठने के लिए कु़रआ निकाला और कुछ लोग ऊपरी मंज़िल में सवार हुए और कुछ लोग निचली मंज़िल में
जब लोग किसी को अत्याचार करते हुए देखें और उसका हाथ न पकड़ें, तो संभव है कि अल्लाह उन तमाम लोगों पर अपना अज़ाब उतार दे।
उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, तुम अवश्य ही भलाई का आदेश देते रहोगे तथा बुराई से रोकते रहोगे, वरना अल्लाह अपनी ओर से तुमपर कोई सज़ा भेज देगा। फिर तुम उसे पुकारोगे, लेकिन तुम्हारी पुकार सुनी नहीं जाएगी।
ऐसे लोग तुम्हारे शासक बन जाएँगे, जो झूठ बोलेंगे और अत्याचार करेंगे। ऐसे में जो उनके झूठ की पुष्टि करेगा और अत्याचार में उनका सहयोग करेगा, उसका मुझसे कोई संबंध नहीं है और मेरा उससे कोई संबंध नहीं है।
अल्लाह ने जितने भी नबी भेजे और जितने भी शासक बनाए, सबके दो प्रकार के सलाहकार होते हैं; एक वह सलाहकार जो भलाई का आदेश देता है और उसकी प्रेरणा देता है। दूसरा वह सलाहकार जो बुराई का आदेश देता है और उसी का प्रोत्साहन देता है
अल्लाह ने अपने रसूल को अनुमति दी थी, तुम्हें अनुमति नहीं दी है। वैसे भी, मुझे केवल दिन की एक घड़ी के लिए अनुमति दी थी। आज वह उसी तरह हराम है, जैसे कल थी। अतः, जो उपस्थित है, वह उसे पहुँचा दे, जो उपस्थित नहीं है।
एक व्यक्ति को उनके पास लाया गया और उन से कहा गया: यह अमुक आदमी है, इसकी दाढ़ी से शराब टपक रही है। यह सुन कर आपने फ़रमाया: हमें जासूसी करने से मना किया गया है, लेकिन यदि कोई चीज़ ज़ाहिर हो तो हम उसकी उसके कारण पकड़ करेंगे
मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल्लाह! पवित्र आत्मा (जिबरील) के द्वारा तू इसकी सहायता कर।?" तो उन्होंने उत्तर दिया : मैं अल्लाह को गवाह बनाकर कहता हूँ कि हाँ, आपने ऐसा कहा था।
तुममें से किसी व्यक्ति को लोगों का भय हक़ बात बोलने से हरगिज़ न रोके, जब वह उसे देख रहा हो या जानता हो।