عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عنهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«بَيْنَمَا رَجُلٌ يَمْشِي بِطَرِيقٍ وَجَدَ غُصْنَ شَوْكٍ عَلَى الطَّرِيقِ فَأَخَّرَهُ، فَشَكَرَ اللَّهُ لَهُ فَغَفَرَ لَهُ».

[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح مسلم: 1914]
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"एक व्यक्ति रास्ते में जा रहा था कि उसने रास्ते में कांटेदार टहनी देखी, तो उसने उसे हटा दिया। अल्लाह ने उसके इस काम को पसंद किया और उसे माफ कर दिया।"

[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 1914]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि एक व्यक्ति रास्ते से जा रहा था। इसी बीच देखा कि एक काँटेदार पेड़ की एक शाखा रास्ते में है और मुसलमानों को कष्ट दे रही है। अतः उसे रास्ते से हटा दिया, तो अल्लाह ने उसके इस कार्य का सम्मान करते हुए उसे क्षमा कर दिया।

हदीस का संदेश

  1. रास्ते से कष्ट देने वाली वस्तु को हटाने की फ़ज़ीलत तथा यह कि यह काम अल्लाह की क्षमा मिलने का कारण बनता है।
  2. नेकी के कामों को हेय दृष्टि से नहीं देखना चाहिए, चाहे थोड़े ही क्यों न हों।
  3. इस्लाम स्वच्छता, सुरक्षित वातावरण तथा सार्वजनिक सुरक्षा का पैरोकार धर्म है।
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