عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«لاَ يُصَلِّي أَحَدُكُمْ فِي الثَّوْبِ الوَاحِدِ لَيْسَ عَلَى عَاتِقَيْهِ شَيْءٌ».
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 359]
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"तुममें से कोई भी व्यक्ति एक कपड़े में इस तरह नमाज़ न पढ़े कि उसके कंधे पर कुछ भी न हो।"
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अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक ही कपड़े में नमाज़ पढ़ने वाले को इस बात से मना किया है कि अपने दोनों कंधों को नंगा छोड़ दे और उनपर कुछ न रखे। क्योंकि दोनों कंधे यद्यपि शरीर के उन भागों में से नहीं हैं, जिनको छुपाए रखना वाजिब है, लेकिन उनपर कपड़ा रख देने के बाद शरीर के उन भागों को छुपाने का काम बेहतर तौर पर संपन्न होता है, जिनको छुपाने का आदेश दिया गया है और इससे अल्लाह के सामने खड़े होते समय उसका सम्मान भी बेहतर तौर पर प्रदर्शित होता है।