عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ:
«تَهَادَوا تَحَابُّوا».
[حسن] - [رواه البخاري في الأدب المفرد وأبو يعلى والبيهقي] - [الأدب المفرد: 594]
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
''एक दूसरे को उपहार दिया करो, इससे परस्पर प्रेम बढ़ेगा।''
[ह़सन] - [इसे बुख़ारी ने अल-अदब अल-मुफ़रद में, तथा अबू यअ़ला और बैहक़ी ने रिवायत किया है] - [अल-अदब अल-मुफ़रद - 594]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुसलमानों को अपने मुस्लिम भाई के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करने पर उभारा है और यह बताया है कि उपहार, मोहब्बत पैदा करने और दिलों को जोड़ने वाली चीज़ों में से एक है।