عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«قَالَ اللَّهُ تَعَالَى: ثَلاَثَةٌ أَنَا خَصْمُهُمْ يَوْمَ القِيَامَةِ: رَجُلٌ أَعْطَى بِي ثُمَّ غَدَرَ، وَرَجُلٌ بَاعَ حُرًّا فَأَكَلَ ثَمَنَهُ، وَرَجُلٌ اسْتَأْجَرَ أَجِيرًا فَاسْتَوْفَى مِنْهُ وَلَمْ يُعْطِهِ أَجْرَهُ».
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"अल्लाह तआला फ़रमाता है : तीन आदमी ऐसे हैं कि क़यामत के दिन मैं उनका दुश्मन होऊंगा। वह आदमी जो मेरा नाम लेकर वादा करे, फिर उसे तोड़ डाले, दूसरा वह आदमी जो किसी आज़ाद आदमी को बेच करके उसकी क़ीमत खा जाए, तीसरा वह आदमी जो किसी मज़दूर को मज़दूरी पर रखे, उससे पूरा काम ले, लेकिन उसे मज़दूरी न दे।"