عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ:
بَعَثَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَرِيَّةً فَاسْتَعْمَلَ رَجُلًا مِنَ الأَنْصَارِ، وَأَمَرَهُمْ أَنْ يُطِيعُوهُ، فَغَضِبَ، فَقَالَ: أَلَيْسَ أَمَرَكُمُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ تُطِيعُونِي؟ قَالُوا: بَلَى، قَالَ: فَاجْمَعُوا لِي حَطَبًا، فَجَمَعُوا، فَقَالَ: أَوْقِدُوا نَارًا، فَأَوْقَدُوهَا، فَقَالَ: ادْخُلُوهَا، فَهَمُّوا، وَجَعَلَ بَعْضُهُمْ يُمْسِكُ بَعْضًا، وَيَقُولُونَ: فَرَرْنَا إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنَ النَّارِ، فَمَا زَالُوا حَتَّى خَمَدَتِ النَّارُ، فَسَكَنَ غَضَبُهُ، فَبَلَغَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَقَالَ: «لَوْ دَخَلُوهَا مَا خَرَجُوا مِنْهَا إِلَى يَوْمِ القِيَامَةِ؛ الطَّاعَةُ فِي المَعْرُوفِ».
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 4340]
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अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, वह कहते हैं :
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक सेना भेजी, उसका सेनापति एक अन्सारी व्यक्ति को नियुक्त किया तथा लोगों को आदेश दिया कि उसका अनुसरण करें। (एक बार सेनापति को) ग़ुस्सा आ गया। उसने लोगों से पूछा : क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने तुम्हें मेरा अनुसरण करने का आदेश नहीं दिया है? लोगों ने उत्तर दिया : अवश्य दिया है। उसने कहा : तुम मेरे लिए लकड़ियाँ जमा करो। लोगों ने (लकड़ियाँ) जमा कर दीं। उसने कहा : आग सुलगाओ। लोगों ने आग सुलगा दी। फिर उसने कहा : उसमें कूद जाओ। लोगों ने कूदने का इरादा कर लिया, लेकिन फिर एक-दूसरे को रोकने लगे और कहने लगे : हम तो आग से ही भागकर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए हैं। वे इसी कशमकश में थे कि आग बुझ गई और उसका गुस्सा भी ठंडा पड़ गया। फिर जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तक यह बात पहुँची, तो आपने फ़रमाया : "अगर वो उस आग में घुस जाते तो क़यामत तक उससे निकल न पाते। अनुसरण केवल शरीअत सम्मत कार्यों में किया जाएगा।"
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 4340]
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक सेना भेजी, एक अन्सारी व्यक्ति को उसका सेनापति नियुक्त कर दिया और सभी को उसका अनुसरण करने का आदेश दिया। एक बार सेनापति को उनपर ग़ुस्सा आ गया। ग़ुस्से में उनसे कहा : क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने तुम्हें मेरा अनुसरण करने का आदेश नहीं दिया है? सभी ने कहा : अवश्य दिया है। उसने कहा : मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि लकड़ियाँ जमा करो, आग जलाओ और फिर उसमें कूद जाओ। चुनाँचे, उन्होंने लकड़ियाँ जमा कीं और आग जलाई। फिर जब उसमें प्रवेश करना चाहा, तो एक-दूसरे को देखने लगे। कहने लगे : हमने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण तो केवल इसी आग से बचने के लिए किया है। ऐसे में क्या हमें इसमें कूदना चाहिए? वे यही सोच रहे थे कि आग के शोले बुझ गए और सेनापति का ग़ुस्सा ठंडा हो गया। इसकी सूचना जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मिली, तो फ़रमाया : यदि वे सेनापति की आज्ञा का पालन करते और उसके द्वारा जलाई गई आग में कूद जाते, तो वे वही यातना सहते रहते और दुनिया के अंत तक उससे बाहर निकल नहीं पाते। सृष्टिकर्ता की अवज्ञा वाले कार्यों में किसी सृष्टि की आज्ञा का पालन नहीं किया जाएगा। आज्ञा का पालन तो केवल नेकी के कामों में करना है, गुनाह के कामों में नहीं।