عَنِ الْمِقْدَادِ بْنِ الْأَسْوَدِ رَضيَ اللهُ عنهُ قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، يَقُولُ:
«تُدْنَى الشَّمْسُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ مِنَ الْخَلْقِ، حَتَّى تَكُونَ مِنْهُمْ كَمِقْدَارِ مِيلٍ»، قَالَ سُلَيْمُ بْنُ عَامِرٍ: فَوَاللهِ مَا أَدْرِي مَا يَعْنِي بِالْمِيلِ؟ أَمَسَافَةَ الْأَرْضِ، أَمِ الْمِيلَ الَّذِي تُكْتَحَلُ بِهِ الْعَيْنُ قَالَ: «فَيَكُونُ النَّاسُ عَلَى قَدْرِ أَعْمَالِهِمْ فِي الْعَرَقِ، فَمِنْهُمْ مَنْ يَكُونُ إِلَى كَعْبَيْهِ، وَمِنْهُمْ مَنْ يَكُونُ إِلَى رُكْبَتَيْهِ، وَمِنْهُمْ مَنْ يَكُونُ إِلَى حَقْوَيْهِ، وَمِنْهُمْ مَنْ يُلْجِمُهُ الْعَرَقُ إِلْجَامًا» قَالَ: وَأَشَارَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِيَدِهِ إِلَى فِيهِ.

[صحيح] - [رواه مسلم] - [صحيح مسلم: 2864]
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मिक़दाद बिन असवद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को यह फ़रमाते हुए सुना है :
''क़यामत के दिन सूरज को सृष्टि से इतना निकट कर दिया जाएगा कि वह एक मील की दूरी पर होगा।'' सुलैम बिन आमिर कहते हैं : अल्लाह की क़सम! मुझे नहीं मालूम, मील का क्या मतलब है? ज़मीन की दूरी या वह लकड़ी जिससे आँखों में सुरमा लगाया जता है? आप आगे फ़रमाते हैं : ''लोग अपने अमल के अनुसार पसीने में डूबे होंगे। कुछ लोग अपने टखनों तक पसीना में डूबे होंगे, कुछ लोग अपने घुटनों तक पसीना में डूबे होंगे, कुछ लोग अपनी कमर तक पसीना में डूबे होंगे तो कुछ लोगों को पसीना लगाम लगाए हुए होगा।'' वर्णनकर्ता कहते हैं : यह बात कहते समय अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने मुँह की ओर इशारा करके दिखाया।

[स़ह़ीह़] - [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 2864]

स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि क़यामत के दिन सूरज को सृष्टि से इतना निकट कर दिया जाएगा कि वह उनके सरों से एक मील की दूरी पर होगा। ताबेई सलीम बिन आमिर कहते हैं : अल्लाह की क़सम, मुझे नहीं पता कि यहाँ मील से तात्पर्य जमीन पर तय की गई दूरी से है या आँखों में सुर्मा लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण मील से। फ़रमाया : लोग उस दिन अपने-अपने कर्मों के अनुसार पसीने में डूबे हुए होंगे। किसी का पसीना टखनों तक होगा, किसी का पसीना घुटनों तक होगा, किसी का पसीना कमर तक होगा और किसी का पसीना मुँह तक होगा, जो उसे बात करने नहीं देगा। वर्णनकर्ता कहते हैं : मुँह तक पसीना होने की बात कहते समय अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने मुँह की ओर इशारा करके दिखाया।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. क़यामत के दिन की भयावह परिस्थितियों का बयान।
  2. क़यामत के दिन हश्र के मैदान में लोग अपने-अपने कर्मों के अनुसार कठिनाइयों का सामना कर रहे होंगे।
  3. अच्छे कर्मों की प्रेरणा और बुरे कर्मों से डराना।
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