عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المؤْمنينَ رَضيَ اللهُ عنها قَالَت:
دَخَلَتْ هِنْدٌ بِنْتُ عُتْبَةَ امْرَأَةُ أَبِي سُفْيَانَ عَلَى رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَقَالَتْ: يَا رَسُولَ اللهِ، إِنَّ أَبَا سُفْيَانَ رَجُلٌ شَحِيحٌ، لَا يُعْطِينِي مِنَ النَّفَقَةِ مَا يَكْفِينِي وَيَكْفِي بَنِيَّ إِلَّا مَا أَخَذْتُ مِنْ مَالِهِ بِغَيْرِ عِلْمِهِ، فَهَلْ عَلَيَّ فِي ذَلِكَ مِنْ جُنَاحٍ؟ فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «خُذِي مِنْ مَالِهِ بِالْمَعْرُوفِ مَا يَكْفِيكِ وَيَكْفِي بَنِيكِ».
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح مسلم: 1714]
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मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं :
अबू सुफ़यान की पत्नी हिंद बिन्त उतबा अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आईं और कहने लगीं : ऐ अल्लाह के रसूल! अबू सुफ़यान एक कंजूस व्यक्ति हैं। वह मुझे इतना खर्च नहीं देते, जो मेरे तथा मेरे बच्चों के लिए काफ़ी हो। अतः, मैं उन्हें बताए बिना उनके धन में से कुछ ले लेती हूँ। क्या इससे मुझे कोई गुनाह होगा? अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम उसके धन में से उतना लो, जो साधारणतः तुम्हारे और तुम्हारे बच्चों के लिए काफ़ी हो।"
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 1714]
हिंद बिंत उतबा ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अपने पति अबू सुफ़यान रज़ियल्लाहु अनहु के बारे में फ़तवा पूछा। उन्होंने बताया कि अबू सुफ़यान एक कंजूस व्यक्ति हैं। वह उनको और उनके बच्चों को पर्याप्त ख़र्च नहीं देते। यही कारण है कि उनको अबू सुफ़यान को बताए बिना उनके धन में से कुछ छुपाकर ले लेना पड़ता है। ऐसे में क्या उनपर कोई गुनाह होगा? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उत्तर दिया : तुम अपने और अपने बच्चों के लिए अबू सुफ़यान के धन में से इतना ले लिया करो, जो यहाँ आम जीवन-शैली के अनुसार पर्याप्त हो। अबू सुफ़यान को इसकी जानकारी न भी रहे, तो कोई हर्ज नहीं है।