عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الخُدْرِيِّ رَضيَ اللهُ عنهُ:
أَنَّ رَجُلًا سَمِعَ رَجُلًا يَقْرَأُ: {قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ} يُرَدِّدُهَا، فَلَمَّا أَصْبَحَ جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَ ذَلِكَ لَهُ، وَكَأَنَّ الرَّجُلَ يَتَقَالُّهَا، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّهَا لَتَعْدِلُ ثُلُثَ القُرْآنِ».
[صحيح] - [رواه البخاري] - [صحيح البخاري: 5013]
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तथा अबू सईद खुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं :
एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति को "क़ुल हुवल्लाहु अहद" पढ़ते हुए सुना, जो उसे बार-बार दोहराए जा रहा था। सुबह हुई तो वह अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास पहुँचा और इसके बारे में बताया। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह इसे कम समझ रहा है। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क़ुरान के समान है।"
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 5013]
अबू सई ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति को देखा कि वह पूरी रात सूरा "क़ुल हुवल्लाहु अहद" पढ़े जा रहा है। इससे आगे कुछ नहीं पढ़ता। सुबह हुई, तो वह अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास पहुँचा और इसके बारे में बताया। गोया सवाल करने वाला इसे थोड़ा समझ रहा था। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए क़सम खाते हुए फ़रमाया : उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क़ुरान के बराबर है।