عن أبي هريرة -رضي الله عنه- قال رسول الله -صلى الله عليه وآله وسلم-: «كل سُلامى من الناس عليه صدقة كل يوم تطلع فيه الشمس: تَعْدِلُ بين اثنين صدقةٌ، وتُعِينُ الرجلَ في دابتِه فتَحملُهُ عليها أو تَرفعُ له عليها متاعَهُ صَدَقَةٌ، والكلمةُ الطيبةُ صدقةٌ، وبكل خُطْوَةٍ تمشيها إلى الصلاة صدقةٌ، وتُميط الأذَى عن الطريق صدقةٌ».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः आदमी के हर जोड़ पर, हर रोज़ जिसमें सूरज निकलता है, सदक़ा है। तुम दो व्यक्तियों के बीच न्याय करो तो सदक़ा है। किसी को उसके जानवर पर सवार होने में मदद करो या उसपर उसका सामान लाद दो तो सदक़ा है। अच्छी बात सदक़ा है, नमाज़ की ओर उठने वाला हर क़दम सदक़ा है और रास्ते से कष्टदायक वस्तु को हटाना भी सदक़ा है।
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व्याख्या

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