عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«أَسْرِعُوا بِالْجِنَازَةِ، فَإِنْ تَكُ صَالِحَةً فَخَيْرٌ تُقَدِّمُونَهَا، وَإِنْ يَكُ سِوَى ذَلِكَ، فَشَرٌّ تَضَعُونَهُ عَنْ رِقَابِكُمْ».

[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 1315]
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"जनाज़े को जल्दी ले चलो। क्योंकि यदि वह नेक है, तो तुम उसे भलाई की ओर बढ़ा रहे हो और यदि बुरा है, तो एक बुरी चीज़ को तुम अपने कंधों से उतार दोगे।"

[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 1315]

स्पष्टीकरण

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जनाज़े को तैयार करने, उसपर नमाज़ पढ़ने और उसे दफ़न करने में जल्दी करने का आदेश दिया है तथा कहा है कि अगर जनाज़ा किसी अच्छे इन्सान का है, तो तुम उसे भलाई यानी क़ब्र की नेमतों की ओर ले जा रहे हो और अगर अच्छे आदमी का नहीं है, तो अपने कंधे से एक बुरी चीज़ को उतार दोगे।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. इब्न-ए-हजर कहते हैं : तेज़ चलना मुसतहब है। लेकिन इतना भी नहीं कि मैयत का कुछ नुक़सान हो जाए या कंधों पर उठाए हुए लोगों अथवा साथ चल रहे लोगों को परेशानी हो जाए।
  2. कफ़न-दफ़न में जल्दी उस समय नहीं की जाएगी, जब मृत्यु अचानक हो जाए तथा बेहोशी की आशंका हो। ऐसी अवस्था में मृत्यु हो गई है, यह बात निश्चित हो जाए, तभी कफ़न-दफ़न किया जाएगा। इसी प्रकार कुछ विशेष कारणों, जैसे नमाज़ियों की अधिक संख्या या रिश्तेदारों के उपस्थित होने आदि, के लिए थोड़ी-बहुत देर की जा सकती है, जब मृत शरीर के ख़राब होने का भय न हो।
  3. जनाज़ा अगर किसी सदाचारी व्यक्ति का है, तो उसके कफ़न-दफ़न में जल्दी करने की प्रेरणा ख़ुद उसके हित में है और अगर किसी दुराचारी व्यक्ति का है, तो फिर यह कफ़न दफ़न में लगे हुए लोगों के हित में है।
  4. नववी कहते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि इन्सान को दुराचारी लोगों की संगत से बचना चाहिए।
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