عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضيَ اللهُ عنهُما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«مَا أَسْكَرَ كَثِيرُهُ فَقَلِيلُهُ حَرَامٌ».

[حسن] - [رواه أبو داود والترمذي وابن ماجه وأحمد] - [سنن أبي داود: 3681]
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जाबिर -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"जिस चीज़ की अधिक मात्रा नशा लाए, उसकी कम मात्रा भी हराम है।"

[ह़सन] - [इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है] - [सुनन अबू दावूद - 3681]

व्याख्या

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि खाने-पीने की हर वह चीज़, जो अधिक मात्रा में लिए जाने से इन्सान की अक़्ल को ले उड़ती है, उसकी कम मात्रा लेना भी हराम है। चाहे अक़्ल न भी ले जाए।

हदीस का संदेश

  1. शरीयत इन्सान की अक़्ल की रक्षा करती है।
  2. बुराई के रास्ते को रोकने के सिद्धांत के एतिबार का सहीह होना,
  3. ऐसा उन सभी चीज़ों को बंद करके किया जाता है जो उन बुराइयों की ओर ले जाती हैं।।
  4. नशा लाने वाली चीज़ों की कम मात्रा भी हराम है। क्योंकि इसी रास्ते पर चलकर इन्सान नशा का आदी बन जाता है।
  5. जिस चीज़ की कम एवं अधिक मात्रा दोनों नशा न लाए, वह हराम नहीं है।
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