عَنْ سَعْدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ:
كُنْتُ أَرَى رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسَلِّمُ عَنْ يَمِينِهِ، وَعَنْ يَسَارِهِ، حَتَّى أَرَى بَيَاضَ خَدِّهِ.

[صحيح] - [رواه مسلم] - [صحيح مسلم: 582]
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साद रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं :
मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को दाईं और बाईं ओर सलाम फेरते हुए देखता था, यहाँ तक कि मैं आपके गाल का उजलापन देख लेता।

[स़ह़ीह़] - [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 582]

स्पष्टीकरण

साद बिन अबू वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अन्हु ने बताया है कि जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपनी नमाज़ में सलाम फेरते, तो पहले सलाम के लिए दाईं जानिब और दूसरे के लिए बाईं जानिब इतना अधिक मुड़ते कि वह आपके गाल की सफेदी देख लेते थे।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. दाईं तथा बाईं ओर बहुत ज़्यादा मुड़ने का शरीयत सम्मत होना।
  2. दाईं और बाईं ओर दो सलाम फेरना शरीयत-सम्मत है।
  3. नववी कहते हैं : यदि कोई दोनों सलाम अपनी दाईं ओर या अपनी बाईं ओर या अपने चेहरे के सामने फेर दे, या पहला सलाम बाईं ओर और दूसरा दाईं ओर फेरे, तो उसकी नमाज़ सही हो जाएगी और दोनों सलाम भी अदा हो जाएँगे, लेकिन उन दोनों सलाम के तरीक़े की फ़ज़ीलत हासिल नहीं होगी।
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भाषा: الإنجليزية الأوردية الإندونيسية अधिक (28)
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