عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضيَ اللهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«مَنْ صَلَّى صَلاَتَنَا وَاسْتَقْبَلَ قِبْلَتَنَا وَأَكَلَ ذَبِيحَتَنَا فَذَلِكَ المُسْلِمُ الَّذِي لَهُ ذِمَّةُ اللَّهِ وَذِمَّةُ رَسُولِهِ، فَلاَ تُخْفِرُوا اللَّهَ فِي ذِمَّتِهِ».
[صحيح] - [رواه البخاري] - [صحيح البخاري: 391]
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अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"जो हमारी नमाज़ की तरह नमाज़ पढ़े और हमारे क़िबले की तरफ मुंह करे और हमारा क़ुर्बान किया हुआ जानवर खाए तो वह ऐसा मुसलमान है, जिसे अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पनाह हासिल है । लिहाज़ा अल्लाह की पनाह में ख़यानत (धोखा) न करो।"
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 391]
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जो व्यक्ति दीन के ज़ाहिरी अहकाम (प्रत्यक्ष विधि-विधानों) का पालन करते हुए हमारी तरह नमाज़ पढ़े, हमारे क़िबले (काबा) की ओर मुँह करे और हमारे ज़बीहा को हलाल समझकर खाए, तो वह ऐसा मुसलमान है जिसे अल्लाह और उसके रसूल की अमानत और उनका वचन हासिल है। लिहाज़ा उसके बारे में अल्लाह की अमानत और वचन को न तोड़ो।