عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«إِذَا دَخَلَ أَحَدُكُمْ المَسْجِدَ فَلْيُسَلِّمْ عَلَى النَّبِيِّ وَلْيَقُلْ: اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ، وَإِذَا خَرَجَ فَلْيُسَلِّمْ عَلَى النَّبِيِّ وَلْيَقُلْ: اللَّهُمَّ اعْصِمْنِي مِنْ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ»، وَلِلْحَاكِمِ: «وَإِذَا خَرَجَ فَلْيُسَلِّمْ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلْيَقُلْ: اللَّهُمَّ أَجِرْنِي مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ».
[حسن] - [رواه ابن ماجه والحاكم] - [سنن ابن ماجه: 773]
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"जब तुममें से कोई मस्जिद में प्रवेश करे, तो नबी पर सलाम भेजे और यह दुआ पढ़े : اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ (ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के द्वार खोल दे), और जब निकले, तो नबी पर सलाम भेजे और यह दुआ पढ़े : اللَّهُمَّ اعْصِمْنِي مِنْ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ (ऐ अल्लाह! धिक्कारित शैतान से मेरी रक्षा कर)", और हाकिम की रिवायत में है : "और जब निकले, तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर सलाम भेजे और यह दुआ पढ़े : اللَّهُمَّ أَجِرْنِي مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ (ऐ अल्लाह! मुझे धिक्कारित शैतान से शरण दे)।"
[ह़सन] - [इसे इब्ने माजह और ह़ाकिम ने रिवायत किया है] - [सुनन इब्ने माजह - 773]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक मुसलमान को यह मार्गदर्शन दिया है कि जब वह मस्जिद में प्रवेश करना चाहे, तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर यह कहकर सलाम भेजे : "اللهم صل وسلم على محمد" (ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दया और शांति भेज), फिर यह कहे : "(اللهم افتح لي أبواب رحمتك)" (ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के द्वार खोल दे)। और जब निकले, तो नबी पर सलाम भेजे और कहे : (اللهم اعصمني من الشيطان الرجيم) (ऐ अल्लाह! मुझे धिक्कारे हुए शैतान से बचा)। और हाकिम की एक रिवायत में है कि वह कहे : (اللهم أجرني من الشيطان الرجيم) (ऐ अल्लाह! मुझे धिक्कारे हुए शैतान से पनाह दे)।