عَنْ إِبرَاهِيمَ النَّخَعِيِّ عَنْ هَمَّامِ بنِ الحَارِثِ قَالَ:
بَالَ جَرِيرٌ، ثُمَّ تَوَضَّأَ، وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ، فَقِيلَ: تَفْعَلُ هَذَا؟ فَقَالَ: نَعَمْ، رَأَيْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَالَ، ثُمَّ تَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ. قَالَ الأَعْمَشُ: قَالَ إِبْرَاهِيمُ: كَانَ يُعْجِبُهُمْ هَذَا الحَدِيثُ؛ لِأَنَّ إِسْلَامَ جَرِيرٍ، كَانَ بَعْدَ نُزُولِ المَائِدَةِ.
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इब्राहीम नख़ई का हम्माम बिन हारिस से वर्णन है, वह कहते हैं :
जरीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने पेशाब किया, फिर वज़ू किया और अपने मोज़ों पर मसह किया, तो उनसे पूछा गया : आप ऐसा करते हैं? उन्होंने कहा : हाँ, मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को देखा है कि आपने पेशाब किया, फिर वज़ू किया और अपने मोज़ों पर मसह किया। आमश ने कहा कि इब्राहीम कहते थे : लोगों को यह हदीस बहुत पसंद थी; क्योंकि जरीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) सूरा माइदा के उतरने के बाद इस्लाम लाए थे।