عَنْ عَبْدَ اللهِ بْنِ عَمْرٍو رَضيَ اللهُ عَنْهُمَا يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«مَنْ لَقِيَ اللهَ لَا يُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا لَمْ تَضُرَّهُ مَعَهُ خَطِيئَةٌ، وَمَنْ مَاتَ وَهُوَ يُشْرِكُ بِهِ لَمْ يَنْفَعْهُ مَعَهُ حَسَنَةٌ».
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अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी न बनाया होगा, उसे कोई पाप हानि नहीं पहुँचाएगा, और जो उससे इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी ठहराया होगा, तो कोई नेकी उसे लाभ नहीं पहुँचाएगी।"