عَنْ أَبِي مُوسَى رَضِيَ اللهُ عَنْهُ قَالَ: قَامَ فِينَا رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِخَمْسِ كَلِمَاتٍ، فَقَالَ:
«إِنَّ اللهَ عَزَّ وَجَلَّ لَا يَنَامُ، وَلَا يَنْبَغِي لَهُ أَنْ يَنَامَ، يَخْفِضُ القِسْطَ وَيَرْفَعُهُ، يُرْفَعُ إِلَيْهِ عَمَلُ اللَّيْلِ قَبْلَ عَمَلِ النَّهَارِ، وَعَمَلُ النَّهَارِ قَبْلَ عَمَلِ اللَّيْلِ، حِجَابُهُ النُّورُ -وَفِي رِوَايَةٍ: النَّارُ- لَوْ كَشَفَهُ لَأَحْرَقَتْ سُبُحَاتُ وَجْهِهِ مَا انْتَهَى إِلَيْهِ بَصَرُهُ مِنْ خَلْقِهِ».
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अबू मूसा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं : हमारे बीच अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम खड़े हुए और पाँच बातें फ़रमाईं :
"अल्लाह सोता नहीं है तथा सोना उसकी महानता के अनुरूप भी नहीं है, वह तराज़ू को नीचे तथा ऊपर करता है, उसकी ओर रात के कर्म दिन के कर्मों से पहले और दिन के कर्म रात के कर्मों से पहले प्रस्तुत किए जाते हैं, उसका पर्दा नूर है -और एक रिवायत में है : आग है- यदि वह उसे खोल दे, तो उसके चेहरे की चमक उसकी सारी सृष्टियों को वहाँ तक जला डालेगी, जहाँ तक उसकी नज़र पहुँचेगी।"