عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ:
عَنْ بَعْضِ أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ -قَالَ: أَبُو عَامِرٍ، قَالَ نَافِعٌ: أُرَاهَا حَفْصَةَ- أَنَّهَا سُئِلَتْ عَنْ قِرَاءَةِ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ: إِنَّكُمْ لَا تَسْتَطِيعُونَهَا قَالَ: فَقِيلَ لَهَا أَخْبِرِينَا بِهَا. قَالَ: فَقَرَأَتْ قِرَاءَةً تَرَسَّلَتْ فِيهَا قَالَ أَبُو عَامِرٍ: قَالَ نَافِعٌ: فَحَكَى لَنَا ابْنُ أَبِي مُلَيْكَةَ {الحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ} [الفاتحة: 2] ثُمَّ قَطَّعَ {الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ} [الفاتحة: 1] ثُمَّ قَطَّعَ {مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ}.

[صحيح] - [رواه أحمد] - [مسند أحمد: 26470]
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इब्ने अबी मुलैका का वर्णन है :
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की किसी पत्नी से रिवायत है (अबू आमिर ने कहा, नाफ़े कहते हैं कि मेरा ख़याल है कि वह हफ़्सा रज़ियल्लाहु अन्हा थीं) उनसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ुरआन पढ़ने के तरीक़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने फ़रमाया : तुम लोग इसकी ताक़त नहीं रखते । उनसे कहा गया : हमें उसके बारे में बताएँ। तो उन्होंने ठहर-ठहर कर पढ़कर दिखाया। अबू आमिर कहते हैं कि नाफ़े ने कहा : तो इब्ने अबू मुलैका ने हमें इस तरह पढ़कर सुनाया : 'अलह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन' यहाँ रुक गए। फिर 'अर-रह़मानिर-रह़ीम' पढ़ने के बाद रुक गए और 'मालिकि यौमिद्दीन' पढ़ने के बाद रुक गए।

[स़ह़ीह़] - [इसे अह़मद ने रिवायत किया है] - [मुसनद अह़मद - 26470]

व्याख्या

उम्मुल मोमिनीन (मोमिनों की माता) हफ़्सा रज़ियल्लाहु अन्हा से पूछा गया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम क़ुरआन की क़िरात किस तरह करते थे? उन्होंने उत्तर दिया : तुम लोग ऐसा नहीं कर सकते, तो लोगों ने उनसे कहा : हमें बताइए तो सही। नाफ़े कहते हैं कि इब्ने अबी मुलैका ने हमें ठहर-ठहर कर सुनाया, ताकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ुरआन पाठ का तरीक़ा बता और उसे समझा सकें। चुनांचे उन्होंने {الحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ} 'अलह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन' पढ़ा, फिर रुक गए, फिर {الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ} 'अर-रह़मानिर-रह़ीम' पढ़ा, फिर रुक गए और फिर {مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ} 'मालिकि यौमिद्दीन' पढ़ा।

हदीस का संदेश

  1. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ुरआन पाठ के तरीक़े का बयान।
  2. अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ुरआन पाठ के तरीक़े का व्यावहारिक नमूना।
  3. क़ुरआन को ठहर-ठहर कर पढ़ना चाहिए, क्योंकि यह उसपर चिंतन-मनन करने में अधिक सहायक है।
  4. सलफ़-ए-सालेहीन क़ुरआन तथा अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अमल से ख़ास दिलचस्पी रखते थे।
  5. तज्वीद और क़ुरआन से संबंधित विज्ञान को जानने का महत्व।
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