عَنْ قَتَادَةَ قَالَ:
سُئِلَ أَنَسٌ كَيْفَ كَانَتْ قِرَاءَةُ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟ فَقَالَ: «كَانَتْ مَدًّا»، ثُمَّ قَرَأَ: {بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ} [الفاتحة: 1] يَمُدُّ بِبِسْمِ اللَّهِ، وَيَمُدُّ بِالرَّحْمَنِ، وَيَمُدُّ بِالرَّحِيمِ.
[صحيح] - [رواه البخاري] - [صحيح البخاري: 5046]
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क़तादा से वर्णित है, वह कहते हैं :
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से पूछा गया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की क़िरात कैसी थी? तो उन्होंने उत्तर दिया : "ख़ूब खींचकर पढ़ते थे।", फिर {बिस्मिल्लाहिर्रह़मानिर्रह़ीम} [सूरह फ़ातिह़ाः 1] पढ़कर बताया कि बिस्मिल्लाह, अर-रह़मान और अर-रह़ीम को खींचकर पढ़ा करते थे।
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 5046]
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से पूछा गया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम क़ुरआन की क़िरात (पाठ) कैसे करते थे? तो उन्होंने जवाब दिया : आप अपनी आवाज़ को खींचकर क़िरात करते थे; आप लफ़्ज़ -ए- जलाला (अल्लाह) में 'हा' से पहले 'लाम' को, 'अर-रह़मान' में 'नून' से पहले 'मीम' को और 'अर-रह़ीम' में 'ह़ा' को खींचते थे।