عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«مَا مِنَ الأَنْبِيَاءِ نَبِيٌّ إِلَّا أُعْطِيَ مَا مِثْلهُ آمَنَ عَلَيْهِ البَشَرُ، وَإِنَّمَا كَانَ الَّذِي أُوتِيتُ وَحْيًا أَوْحَاهُ اللَّهُ إِلَيَّ، فَأَرْجُو أَنْ أَكُونَ أَكْثَرَهُمْ تَابِعًا يَوْمَ القِيَامَةِ».
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"नबियों में से कोई भी नबी ऐसा नहीं हुआ, जिसे ऐसे चमत्कार (निशानियाँ) न दिए गए हों जिन्हें देखकर मनुष्य ईमान ले आए, और जो चमत्कार मुझे दिया गया, वह वह्य है जो अल्लाह ने मुझपर अवतरित की है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि क़यामत के दिन मेरे अनुसरणकर्ता सबसे अधिक होंगे।"