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हदीस नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जब उन्हें यमन भेजा, तो आदेश दिया कि वह हर तीस गायों पर एक एक वर्षीय बछड़ा या बछिया लें

عَنْ مُعَاذٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ:
أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمَّا وَجَّهَهُ إِلَى الْيَمَنِ أَمَرَهُ أَنْ يَأْخُذَ مِنَ الْبَقَرِ مِنْ كُلِّ ثَلَاثِينَ تَبِيعًا أَوْ تَبِيعَةً، وَمِنْ كُلِّ أَرْبَعِينَ مُسِنَّةً، وَمِنْ كُلِّ حَالِمٍ -يَعْنِي مُحْتَلِمًا- دِينَارًا أَوْ عَدْلَهُ مِنَ المَعَافِرِ، ثِيَابٌ تَكُونُ بِالْيَمَنِ.

मुआज़ रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है :
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जब उन्हें यमन भेजा, तो आदेश दिया कि वह हर तीस गायों पर एक एक वर्षीय बछड़ा या बछिया लें और हर चालीस गायों पर एक दो वर्षीय गाय वसूल करें, तथा हर बालिग़ व्यक्ति से एक दीनार या उसके बराबर मआफ़िरी कपड़े, जो यमन में बनते हैं, लें।

शवाहिद के आधार पर स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है सुनन अबू दावूद - 1576

स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु को लोगों को शिक्षा देने और (इस्लाम की ओर) बुलाने के लिए यमन भेजा था। भेजते समय उन्हें जो आदेश दिए, उनमें से एक यह था कि वह मुसलमानों से उनकी गायों की ज़कात इस तरह वसूल करें कि हर तीस गायों पर एक साल का एक बछड़ा या बछिया (तबीअ या तबीआ) लें, और हर चालीस गायों पर दो साल की एक गाय (मुसिन्ना) लें। इसी तरह वह अहले किताब यानी यहूदियों और ईसाइयों, के हर बालिग़ पुरुष से एक दीनार जिज़्या लें, या उसके बराबर यमन के 'मआफ़िरी' नामक कपड़े लें।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. जिज़्या (सुरक्षा कर) केवल वयस्क व्यक्ति से ही लिया जाएगा; क्योंकि जिज़्या न लेने का मानक यह है कि यह उन लोगों से नहीं लिया जाता, जिन्हें बंदी बना लिए जाने की स्थिति में क़त्ल करना जायज़ नहीं है, जैसे कि बच्चे, महिलाएँ और इसी तरह के दूसरे लोग।
  2. जिज़्या की मात्रा का निर्धारण इमाम (शासक) के इज्तिहाद (विवेक) पर निर्भर है, क्योंकि यह स्थान, काल, अमीरी तथा ग़रीबी के अनुसार अलग-अलग होता है। इसका प्रमाण यह है कि ख़ुद नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ही ने यमन वालों पर इसे निर्धारित किया था और आपने मुआज़ से कहा था : “हर बालिग़ व्यक्ति से एक दीनार लो”, जबकि उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के निर्धारण में जिज़्या की मात्रा बढ़ गई, जब उन्होंने इसे शाम वालों पर निर्धारित किया।
  3. ज़कात इकट्ठा करने का प्रबंध करना और उसे इकट्ठा करने वालों को नियुक्त करना, शासक के कार्यों में से है।
  4. तबीअ़ : वह बछड़ा है जो एक साल पूरा कर चुका हो और दूसरे साल में प्रवेश कर चुका हो। उसे तबीअ़ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह अभी भी अपनी माँ के पीछे चलता है।
  5. दीनार : एक स्वर्ण मुद्रा है। इस्लामी दीनार का वज़न सोने का सवा चार ग्राम (4.25 ग्राम) है।

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