عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ:
أَنَّ نَبِيَّ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَتَبَ إِلَى كِسْرَى، وَإِلَى قَيْصَرَ، وَإِلَى النَّجَاشِيِّ، وَإِلَى كُلِّ جَبَّارٍ يَدْعُوهُمْ إِلَى اللهِ تَعَالَى، وَلَيْسَ بِالنَّجَاشِيِّ الَّذِي صَلَّى عَلَيْهِ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ.
[صحيح] - [رواه مسلم] - [صحيح مسلم: 1774]
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अनस रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं :
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसरा, क़ैसर, नजाशी और हर बड़े शासक को उच्च एवं महान अल्लाह की ओर बुलाते हुए पत्र लिखा, और यह वह नजाशी नहीं थे, जिनकी नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जनाज़े की नमाज़ पढ़ी थी।
[स़ह़ीह़] - [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 1774]
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु बता रहे हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु से पहले अपने आस-पास की क़ौमों के बादशाहों को इस्लाम की दावत देते हुए ख़त लिखे; तो आपने किसरा को लिखा, तथा किसरा फ़ारस के हर बादशाह का लक़ब (पदवी) है, और क़ैसर को लिखा, जो रूम के हर बादशाह का लक़ब है, और नजाशी को लिखा, जो हब्शा के बादशाहों का लक़ब है। और आपने लोगों पर अत्याचार करने वाले हर ज़ालिम बादशाह को भी ख़त लिखा, तथा अनस रज़ियल्लाहु अन्हु ने यह स्पष्ट किया कि जिस नजाशी को ख़त लिखा गया, यह वह नजाशी नहीं थे, जो मुसलमान हुए थे तथा जब उन्होंने मृत्यु पाई तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन पर ग़ायबाना नमाज़-ए-जनाज़ा (अनुपस्थिति में जनाजे की नमाज़) पढ़ी।