عن عائشة -رضي الله عنها- قالتْ: قالَ رسولُ اللهِ -صلى الله عليه وسلم-: «الذي يقرَأُ القرآنَ وهو مَاهِرٌ به مع السَّفَرَةِ الكِرَامِ البَرَرَةِ، والذي يقرَأُ القرآنَ ويَتَتَعْتَعُ فيه وهو عليه شَاقٌ لَهُ أجْرَانِ».
[صحيح.] - [متفق عليه، أوله من البخاري إلا أنه فيه: "حافظ" بدل "ماهر"، وآخره لفظ مسلم.]
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आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जो व्यक्ति क़ुरआन पढ़ता है और वह उसमें निपुण है, वह सम्मानित और नेक फ़रिश्तों के साथ होगा, तथा जो अटक- अटक कर क़ुरआन पढ़ता है और उसे क़ुरआन पढ़ने में कठिनाई होती है, उसके लिए दोहरा सवाब है।
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व्याख्या

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