हदीसों की सूची
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क्या तुम नमाज़ के लिए पुकारी जाने वाली अज़ान को सुनते हो?” उसने कहा : हाँ, सुनता हूँ, तो आप ने फ़रमाया : “फिर तो तुम अवश्य उसको ग्रहण करो (अर्थाथ; माज़ पढ़ने के लिए मस्जिद आओ)।”
आदमी का जमात के साथ नमाज़ पढ़ना बाज़ार या घर में नमाज़ पढ़ने की तुलना में (पुण्य के मामले में) बीस से अधिक दर्जा बढ़ा हुआ होता है
जिसने लहसुन या प्याज़ खाया हो वह हमसे दूर रहे - या फ़रमाया : - हमारी मस्जिद से दूर रहे और अपने घर में बैठा रहे।
जो सुबह के समय या शाम के समय मस्जिद की ओर जाता है, तो वह सुबह या शाम को जब भी जाता है, उसके बदले अल्लाह उसके लिए जन्नत में सत्कार का सामान तैयार करता है।
ऐ लोगों! तुम यह दोनों पदार्थ- प्याज़ एवं लहसुन- खाते हो, मैं इनको बुरा समझता हूँ
“जमात के साथ नमाज़ अकेले की नमाज़ से सवाब में पच्चीस दर्जे ज़्यादा है और रात दिन के फरिश्ते फज्र की नमाज़ में जमा होते हैं।”
जो अज़ान सुने लेकिन नमाज़ पढ़ने के लिए (मस्जिद) न आए, उसकी नमाज़ नहीं, सिवाय तब जब कि उसके पास कोई उज़्र (मजबूरी) हो।
''पुरुषों के लिए सर्वोत्तम सफ़ सबसे प्रथम सफ है और सबसे बुरी सफ़ सबसे अंतिम सफ़ है। जबकि महिलाओं के लिए सबसे अच्छी सफ़ अंतिम सफ़ है तथा सबसे बुरी सफ़ सबसे प्रथम सफ़ है।
“यह दो नमाज़ें मुनाफिकों के लिए सर्वाधिक कठिन हैं और यदि वह जान लेते कि इनमें कितना सवाब है, तो वे अवश्य आते, चाहे (हाथ एवं) घुटनों के बल घिसटते हुए ही क्यों न हो।
जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो वह उसे न रोके।
जमात के साथ पढ़ी गई नमाज़ अकेले पढ़ी गई नमाज़ के मुक़ाबले में सत्ताईस दरजा श्रेष्ठ है।
बनू सलमा! तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे। तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे।
अगली सफ़ को पूरा करो, फिर उसके बाद वाली को, और यदि (नमाज़ियों की संख्या कम होने के कारण) सफ़ में कोई कमी रह जाए, तो वह सबसे पिछली सफ़ में होनी चाहिए।
जब नमाज़ खड़ी हो जाए, तो फ़र्ज़ नमाज़ के सिवा कोई नमाज़ ही नहीं।
अपने परिवार ओर वापस जाओ, उनके बीच रहो, उन्हें शिक्षा प्रदान करो, आदेश दो और अमुक नमाज़ अमुक समय में तथा अमुक नमाज़ अमुक समय में पढ़ो। जब नमाज़ का समय आ जाए, तो तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारे लिए अज़ान दे और तुममें सबसे अधिक आयु वाला व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे।
आदमी को जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से घर तथा बाज़ार में नमाज़ पढ़ने की तुलना में पच्चीस गुना अधिक सवाब मिलता है।
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