عن خَيْثَمَةَ، قال: كنا جلوسًا مع عبد الله بن عمرو، إذ جاءه قَهْرَمَانٌ له فَدَخَلَ، فقال: أَعْطَيْتَ الرَّقِيقَ قُوتَهُمْ؟ قال: لا، قال: فَانْطَلِقْ فَأَعْطِهِمْ، قال: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «كَفَى بِالْمَرْءِ إِثْمًا أَنْ يَحْبِسَ عَمَّنْ يَمْلِكُ قُوتَهُ».
[صحيح.] - [رواه مسلم.]
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ख़ैसमा से रिवायत है, वह कहते हैं कि हम लोग अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- के साथ बैठे हुए थे कि इसी बीच उनके घर की व्यवस्था से जुड़ा हुआ एक व्यक्ति उनके पास आया, तो उन्होंने उससे कहा : क्या तुमने ग़ुलामों को उनका राशन दे दिया? उसने कहा : नहीं, तो आपने फ़रमाया : जाओ और उनको राशन दे दो। फिर बताया कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “किसी व्यक्ति के पापी (गुनहगार) होने के लिए बस इतना काफी है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का राशन रोक ले, जिसका राशन उसके हाथ में है।”
सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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