عن طارق المُحَارِبِيِّ، قال: قَدِمْنَا المدينة فإذا رسول الله -صلى الله عليه وسلم- قَائِمٌ على المِنْبَرِ يَخْطُبُ النَّاسَ وهو يقول: "يَدُ الْمُعْطِي الْعُلْيَا، وَابْدَأْ بِمَنْ تَعُولُ: أُمَّكَ وأَبَاكَ، وأُخْتَكَ وأَخَاكَ، ثُمَّ أَدْنَاكَ أَدْنَاكَ".
[صحيح.] - [رواه النسائي.]
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तारिक़ अल-मुहारिबी से वर्णित है, वह कहते हैं : हम लोग मदीना पहुँचे तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मिंबर पर खड़े होकर ख़ुतबा (भाषण) दे रहे थे और फ़रमा रहे थे : “देने वाले का हाथ ऊपर होता है। आरंभ उससे करो जिसके ऊपर खर्च करना तुम्हारे ऊपर वाजिब है : तुम्हारी माता, तुम्हारे पिता, तुम्हारी बहन, तुम्हारे भाई, फिर सबसे निकट का संबंधी और उसके बाद सबसे निकट का संबंधी।”
सह़ीह़ - इसे नसाई ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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