عن أبي موسى الأشعري -رضي الله عنه- عن النبيِّ -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم- أَنَّهُ قَالَ: «الخَاِزنُ المسلم الأمين الَّذِي يُنْفِذُ ما أُمِرَ بِهِ فَيُعْطِيهِ كَامِلاً مُوَفَّراً طَيِّبَةً بِهِ نَفسُهُ فَيَدْفَعُه إلى الَّذِي أُمِرَ لَهُ بِهِ، أَحَدُ المُتَصَدِّقِين». وفي رواية: «الذي يُعطِي مَا أُمِرَ به».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "अमानतदार, मुसलमान कोषाधिकारी, जो खुशी-खुशी अक्षरशः उसका पालन करता हो, जिसका आदेश उसे मिला हो और वहीं खर्च करता हो, जहाँ खर्च करने का आदेश उसे दिया गया हो, वह भी एक सदक़ा करने वाला है।" तथा एक रिवायत में हैः "जो वह देता हो, जिसका उसे आदेश दिया गया हो।"
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व्याख्या

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