عن عائشة -رضي الله عنها- قالت: «كان النبي -صلى الله عليه وسلم- إذا أراد أَنْ يَخْرُج أَقْرَعَ بَيْن نِسائه، فأيَّتُهُنَّ يَخْرُج سَهْمُها خَرَج بها النبي -صلى الله عليه وسلم-، فَأَقْرَعَ بَيْنَنَا في غَزْوَةٍ غَزَاها، فَخَرج فيها سَهْمِي، فخَرَجْتُ مع النبي -صلى الله عليه وسلم- بَعْد ما أُنْزِلَ الحِجابُ».
[صحيح] - [متفق عليه]
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आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का वर्णन है, वह कहती हैं कि जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे साथ लेकर यात्रा में निकलते। एक युद्ध में क़ुरआ अंदाज़ी की, तो मेरा नाम निकला और मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ गई। यह परदा का आदेश आने के बाद की बात है।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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