أنَّ عَائِذَ بن عَمْرو -رضي الله عنه- دَخَل على عُبَيد الله بن زياد، فقال: أي بُنَيَّ، إِنِّي سَمِعت رَسُول الله -صلى الله عليه وسلم- يقول: «إِنَّ شَرَّ الرِّعَاءِ الحُطَمَةُ» فَإِيَّاك أَن تَكُون مِنهُم، فقال له: اجْلِس فَإِنَّما أَنْت مِن نُخَالَةِ أَصحَاب محمَّد -صلى الله عليه وسلم- فقال: وهل كَانَت لَهُم نُخَالَة؟! إِنَّمَا كَانَت النُخَالَة بَعدَهُم وَفِي غَيرِهِم.
[صحيح.] - [رواه مسلم.]
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आइज़ बिन अम्र- रज़ियल्लाहु अन्हु- उबैदुल्लाह बिन ज़ियाद के पास गए और कहा कि ऐ बेटे! मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना हैः सबसे बुरे शासक जनसाधारण पर अत्याचार करने वाले हैं। अतः, तुम ऐसे लोगों में शामिल न होना। यह सुनकर उबैदुल्लाह बिन ज़ियाद ने उनसे कहाः बैठ जाइए। आपकी हैसियत तो मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथियों में वही है, जो आटे में चोकर (दूसरे श्रेणी के लोग) की होती है। उन्होंने कहाः क्या उनके अंदर भी चोकर हुआ करता था? चोकर तो उनके बाद के लोग तथा उनके सिवा अन्य लोग हैं।
सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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