عن أم المؤمنين عائشة -رضي الله عنها- قالت: إِنْ كَانَ رسولُ اللهِ -صلى الله عليه وسلم- لَيَدَعُ العَمَلَ، وهو يُحِبُّ أَنْ يَعْمَلَ بِهِ؛ خَشْيَةَ أَنْ يَعْمَلَ بِهِ النَّاسُ فَيُفْرَضَ عَلَيْهِمْ.
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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मोमिनों की माता आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई काम पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए।
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व्याख्या

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