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हदीस नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म- ने तीन दिरहम कीमत वाली ढाल चोरी करने के जुर्म में हाथ काटा।

عبدُ الله بنُ عمر رضي اللهُ عنهما «أَنَّ النَّبِي صلى الله عليه وسلم قَطَع فِي مِجَنٍّ قِيمَتُهُ -وَفِي لَفْظٍ: ثَمَنُهُ- ثَلاثَةُ دَرَاهِمَ».

अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म- ने तीन दिरहम कीमत वाली ढाल चोरी करने के जुर्म में हाथ काटा।

सह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

स्पष्टीकरण

अल्लाह ने मुसलमानों के लहू उनकी इज़्ज़त और धन की रक्षा प्रत्येक उन माध्यमों से की है, जो उपद्रवी को रोक सके। इसी कारण उस ने चोर -जो छिपा कर हिफ़ाज़त से रखे हुए धन चुराए- का दंड रखा है कि उसका वह अंग काट लिया जाए, जिस से उस ने चोरी की, ताकि यह उसके पाप का कफ़्फ़ारा हो और सवंय वह तथा दूसरे लोग भी गलत तरीक़ों से बाज़ आ जाएं और उचित एवं वैध तरीके से कमाएं। तो काम भी अधिक होगा तथा लाभ भी अधिक होगा, इस तरह दुनिया भी आबाद होगी और लोग भी सम्मानित होंगे। अल्लाह की हिकमत है कि उस ने चोरी के कारण हाथ काटे जाने का निसाब तीन दिरहम अर्थात सोने के एक दीनार का चतुर्थांश रखा है, ताकि मुसलमानों के माल और उनका जीवन सुरक्षित रहे और शांति क़ायम रहे और लोग अपने धनों को कमाने तथा बढ़ाने में इस्तेमाल करें। यह एक ग्राम और एक ग्राम के सोलहवें हिस्से (1.0625) के समान है, क्योंकि एक दीनार 4.25 ग्राम का होता है।

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