عن أبي هريرة -رضي الله عنه- قال: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «الإيمانُ يمانٍ والحِكمةُ يمانِيَة، وأَجد نَفَسَ الرحمن من قِبَل اليمن, أَلَا إنَّ الكفرَ والفسوقَ وقسوةَ القلب في الفَدَّادين أصحاب المَعِز والوَبَر».
[صحيح] - [رواه أحمد والطبراني]
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अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: ईमान तो यमनी है और हिकमत भी यमनी है और मैं मुसलमानों को संकट से छुटकारा दिलाने का 'रहमानी' जज़्बा यमन की दिशा से महसूस करता हूँ। सुन लो! कुफ़्र, गुनाह और दिल की सख़्ती बकरी तथा ऊँट वालों में होती है, जो खेती तथा जानवरों से चिपके रहने के कारण ऊँची आवाज़ में बात करने के आदी होते हैं।
सह़ीह़ - इसे तबरानी ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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