عن أبي سعيد الخدري -رضي الله عنه- قال: كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- يَتَعَوَّذُ مِنَ الجَانِّ، وعَيْنِ الإنسان، حتى نَزَلَتْ المُعَوِّذتان، فلمَّا نَزَلَتا، أخذ بهما وتركَ ما سواهما.
[صحيح.] - [رواه الترمذي والنسائي وابن ماجه.]
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अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन्नों और इनसानों की बुरी नज़र से अल्लाह की शरण माँगा करते थे, यहाँ तक कि 'क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिल-फ़लक़' और 'क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिन-नास' उतरीं। जब यह दोनों सूरतें उतरीं तो इन्हें पढ़ने लगे और इनके सिवा अन्य चीज़ें छोड़ दीं।
सह़ीह़ - इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है ।

व्याख्या

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