عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «لا تنُكْحَ ُالأيُّم حتى تُستأمر، ولا تنكح البكر حتى تُستَأذن، قالوا: يا رسول الله، فكيف إذنها قال: أن تسكت». المزيد
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः विधवा स्त्री की शादी नहीं हो सकती, जब तक उससे मशविरा न कर लिया जाए तथा कुँवारी स्त्री की शादी नहीं हो सकती, जब तक उसकी अनुमति न ले ली जाए। सहाबा ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! उसकी अनुमति कैसे ली जाए? तो फ़रमायाः उसकी अनुमति यह है कि वह ख़ामोश रहे।