عن واثلة بن الأسقع -رضي الله عنه- مرفوعاً: « صلى بنا رسول الله -صلى الله عليه وسلم- على رجل من المسلمين، فسمعته يقول: «اللهم إن فلان ابن فلان في ذمتك وحبل جِوَارِكَ، فَقِهِ فِتْنَةَ القبر، وعذاب النار، وأنت أهل الوفاء والحمد؛ اللهم فاغفر له وارحمه، إنك أنت الغفور الرحيم».
[صحيح] - [رواه أبو داود وابن ماجه وأحمد]
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वासिला बिन असक़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) वर्णन करते हुए कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें एक मुसलमान की नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ाई, तो मैंने आपको कहते हुए सुनाः "ऐ अल्लाह, अमुक पुत्र अमुक तेरी शरण तथा तेरी सुरक्षा में है। अतः उसे क़ब्र की आज़माइश और आग के अज़ाब से बचा। तू दाता और प्रशंसायोग्य है। ऐ अल्लाह, इसे क्षमा कर दे और इसपर दया कर। निश्चय ही तू अति क्षमाशील और दयावान है।"
सह़ीह़ - इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है ।

व्याख्या

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