عن عبد الله بن زمعة -رضي الله عنه- أنّه سمع النبي -صلى الله عليه وسلم- يخطب، وذكر الناقة والذي عقرها، فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «إذِ انبَعَثَ أشقاها: انْبَعَثَ لَهَا رجل عزِيز، عَارِم منيع في رَهطِه»، ثم ذكر النساء، فوعظ فيهنَّ، فقال: «يَعمِد أحدكم فيجلد امرأته جلد العبد، فلعلَّه يُضَاجِعُهَا من آخر يومه» ثمَّ وعظهم فِي ضَحِكِهم من الضَّرطَة، وقال: «لم يضحك أحدكم ممَّا يفعل؟!».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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अब्दुल्लाह बिन ज़मआ (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ख़ुतबा देते हुए सुना। आपने (ख़ुतबे के दौरान सालेह अलैहिस्सलाम के) ऊँट तथा उसका वध करने वाले का ज़िक्र करते हुए फ़रमायाः (क़ुरआन की आयत) 'जब उनका सबसे अभागा व्यक्ति उठा' का अर्थ यह है कि उसे मारने के लिए एक शक्तिशाली, दुराचारी और अपनी क़ौम का मज़बूत व्यक्ति खड़ा हुआ।" फिर स्त्रियों के बारे में बताया और उनके बारे में समझाते हुए फ़रमायाः "तुममें से कोई उठता है और अपनी पत्नी को दास की तरह मारता है। जबकि हो सकता है कि वह उसी दिन के अंतिम भाग में उससे संभोग भी करे।" फिर मलद्वार से निकलने वाली हवा पर हँसने के बारे में समझाते हुए फ़रमायाः "तुममें से कोई ऐसे काम पर क्यों हँसता है, जो वह ख़ुद भी करता है।"
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व्याख्या

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