عن فضالة بن عبيد -رضي الله عنه-: أن رسول الله -صلى الله عليه وسلم- كان إذا صلى بالناس يَخِرُّ رجال من قامتهم في الصلاة من الخَصَاصَة -وهم أصحاب الصُّفة- حتى يقول الأعراب: هؤلاء مجانين. فإذا صلى رسول الله -صلى الله عليه وسلم- انصرف إليهم، فقال: «لو تعلمون ما لكم عند الله -تعالى-، لأحببتم أن تزدادوا فاقة وحاجة».
[صحيح.] - [رواه الترمذي.]
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फ़ज़ाला बिन उबैद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब लोगों को नमाज़ पढ़ाते, तो कुछ लोग (जो दरअसल सुफ़्फ़ा वाले थे) भूख के कारण गिर पड़ते, यहाँ तक कि देहात वाले कहने लगते : ये पागल लोग हैं। ऐसे में जब आप नमाज़ पढ़ लेते, तो उनकी ओर मुख करके फ़रमाते : "यदि तुम्हें मालूम हो जाता कि महान अल्लाह के निकट तुम्हारे लिए क्या रखा है, तो तुम चाहते कि तुम्हारी निर्धनता तथा हाजतमंदी और बढ़ जाए।"
सह़ीह़ - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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