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हदीस क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «لا تقوم الساعة حتى يحسر الفرات عن جبل من ذهب يُقْتَتَلُ عليه، فَيُقْتَلُ من كل مائة تسعة وتسعون، فيقول كل رجل منهم: لعلي أن أكون أنا أنجو». وفي رواية: «يوشك أن يحسر الفرات عن كنز من ذهب، فمن حضره فلا يأخذ منه شيئا».

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "क़यामत कायम नहीं होगी, यहाँ तक कि फ़ुरात नदी से सोने का पहाड़ निकल आए, फिर उसपर लड़ाई होगी और प्रत्येक सौ में से निन्यानवे लोग मारे जाएँगे। उनमें से हर आदमी सोचेगा कि शायद मैं ही बच जाऊँ।" तथा एक रिवायत में हैः "निकट है कि फ़ुरात नदी से सोने का खज़ाना निकल आए। अतः, जो उस समय उपस्थित हो, वह उस में से कुछ न ले।"

सह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

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