عن عقبة بن عامر، يقول: إن رسول الله -صلى الله عليه وسلم- قال: «إنِّي أخاف على أُمَّتي اثنَتَيْن: القرآنَ واللَّبَن، أما اللَّبَن فيَبْتَغُون الرِّيفَ ويتَّبِعون الشَّهَوَاتِ ويَتْركون الصلوات، وأما القرآن فيتعلَّمه المنافقون فيُجادِلون به المؤمنين».
[صحيح.] - [رواه أحمد.]
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उक़बा बिन आमिर (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “मैं अपनी उम्मत पर दो चीजों से डरता हूँः क़ुरआन और दूध। जहाँ तक दूध की बात है, तो लोग उसके कारण देहातों की ओर चले जाएँगे और अपनी इच्छाओं के पीछे भागेंगे तथा नमाज़ छोड़ेंगे। रही बात क़ुरआन की, तो मुनाफ़िक़ भी उसे सीख लेंगे और उसके आधार पर मोमिनों से बहस करेंगे।”
सह़ीह़ - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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